सड़कों पर ₹16 लाख करोड़ खर्च, फिर भी 12 साल में सिर्फ 13 किमी/घंटा बढ़ी कार की स्पीड; कटे 1 करोड़ पेड़

सड़कों पर ₹16 लाख करोड़ खर्च, फिर भी 12 साल में सिर्फ 13 किमी/घंटा बढ़ी कार की स्पीड; कटे 1 करोड़ पेड़

सड़कों पर ₹16 लाख करोड़ बहाए, फिर भी 12 साल में कार की स्पीड सिर्फ 13 किमी/घंटा बढ़ी; 1 करोड़ पेड़ भी कटे

नई दिल्ली: देश में विश्वस्तरीय हाईवे और एक्सप्रेसवे के तमाम दावों के बीच जमीनी हकीकत हैरान करने वाली है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संसद में पेश आंकड़ों और नीति आयोग की लॉजिस्टिक्स रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में हाईवे नेटवर्क के विस्तार पर करीब ₹16 लाख करोड़ खर्च किए गए। इसके बावजूद वाहनों की औसत रफ्तार में नाममात्र का सुधार हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014 में नेशनल हाईवे पर कारों की औसत गति 45 किमी/घंटा थी, जो 2026 में बढ़कर महज 52 से 58 किमी/घंटा तक ही पहुंच पाई है—यानी 12 साल में अधिकतम रफ्तार केवल 13 किमी/घंटा ही सुधरी। वहीं ट्रकों की औसत गति में महज 2 किमी/घंटा की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब यह है कि 100 किमी के सफर में एक कार औसतन सिर्फ 10 मिनट की बचत कर पा रही है।

इस धीमी रफ्तार की भारी कीमत देश को चुकानी पड़ रही है। ट्रैफिक जाम और धीमी गति के चलते सालाना करीब ₹2 लाख करोड़ का ईंधन बर्बाद होता है। अमेरिका-यूरोप में जहां ट्रक रोजाना 700–800 किमी तय करते हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा 350 किमी पर अटका है।

पर्यावरण पर भी इसका विनाशकारी असर पड़ा है। हाईवे निर्माण के लिए 12 वर्षों में 1 करोड़ से अधिक पेड़ काट दिए गए (स्टेट हाईवे जोड़ें तो संख्या 1.5 करोड़ पार है), जिससे सुप्रीम कोर्ट कमेटी के मानकों के अनुसार सालाना ₹75,000 करोड़ का पर्यावरणीय नुकसान हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ 0.1% ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर झोंक दिया गया, जबकि 99.9% सामान्य हाईवे पर अवैध कट, अतिक्रमण और त्रुटिपूर्ण बाईपास डिजाइन के कारण वाहनों की गति आज भी 40 किमी/घंटा के आसपास घिसट रही है।